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#ओशो
ओशो - prame a यदि चाहते होे कि जीवन में आनंद ही आनंद हो जाए कि कोई भी चोट चोट न रहे, कि कोई पत्थर भी मारे तो फूल की वर्षा हो कि कोई जहर भी पिलाए तो अमृत हो जाफ না ওমক্ধা ৎক ৪ী যাহনা 6: अपेक्षाओं को छोड़ दो॰ निरपेक्ष होकर जीअ हाथ में है और निरपेक्षता ' तुम्हारे ' कोई दूसरा तुम्हें दे न सकेगा prame a यदि चाहते होे कि जीवन में आनंद ही आनंद हो जाए कि कोई भी चोट चोट न रहे, कि कोई पत्थर भी मारे तो फूल की वर्षा हो कि कोई जहर भी पिलाए तो अमृत हो जाफ না ওমক্ধা ৎক ৪ী যাহনা 6: अपेक्षाओं को छोड़ दो॰ निरपेक्ष होकर जीअ हाथ में है और निरपेक्षता ' तुम्हारे ' कोई दूसरा तुम्हें दे न सकेगा - ShareChat