ShareChat
click to see wallet page
search
लिखा हुआ राम नाम देखा जो अंगूठी पै तो पड़ गयी वेदेही बड़ी ही उलझन में सोचने लगीं ये अंगूठी उन्की है जिन्हें जीत नहीं सकता कोई त्रिभुवन में हर्ष से भर गया हृदय विषाद चल चल कर उठ अश्रु नयन में बार बार मुद्रिका को मस्तक से स्पर्श कर प्रभु को प्रणाम किया मन ही मन में ।। 46.7 हज़ार #ramayan ## Jay shriram #🙏🙏 JAY SHRIRAM🙏🙏
# Jay shriram - ShareChat
00:50