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#शेतकरी
शेतकरी - का अंतिम लेखा-जोखा अन्नदाता यह ज़िंदगी नहीं॰ खेत का क़र्ज़ है, তমাঁ সাঁস লনা নী अब एक फ़र्ज़ है। खाद और पानी में सब कुछ झोंक दिया, ट्रैक्टर ने दम भरा पर किस्मत ने रोक दिया। आसमाँ दो बार रौंद R =61, एक TT, जो खडा था खेत में॰ सब मिट्टी में  बूँद गया। ये कैसा हिसाब है, लाखों का   नुक़सान, अज़ाब   है। आया है बस एक  बोरा, हाथ 46 सरकार! तेरे बीमे की क्या मज़ाक है, रक़म दो-तीन हज़ारी पर ये कैसी चालाक   है? पसीना बिका, तेरी आँखों के सामने, खून जब बस छोटी सी क़ीमत में? तब क्यों तौल दिया हमें, हम माँगते हैं अब॰ हर खर्च का हिसाब हो, कर्जमाफी से पहले, JqIq 571 इंसाफ़ CT माटी के इस बेटे को, जीना सिखाया जाए, या फिर सुकून से इस धरती में सुलाया जाए! का अंतिम लेखा-जोखा अन्नदाता यह ज़िंदगी नहीं॰ खेत का क़र्ज़ है, তমাঁ সাঁস লনা নী अब एक फ़र्ज़ है। खाद और पानी में सब कुछ झोंक दिया, ट्रैक्टर ने दम भरा पर किस्मत ने रोक दिया। आसमाँ दो बार रौंद R =61, एक TT, जो खडा था खेत में॰ सब मिट्टी में  बूँद गया। ये कैसा हिसाब है, लाखों का   नुक़सान, अज़ाब   है। आया है बस एक  बोरा, हाथ 46 सरकार! तेरे बीमे की क्या मज़ाक है, रक़म दो-तीन हज़ारी पर ये कैसी चालाक   है? पसीना बिका, तेरी आँखों के सामने, खून जब बस छोटी सी क़ीमत में? तब क्यों तौल दिया हमें, हम माँगते हैं अब॰ हर खर्च का हिसाब हो, कर्जमाफी से पहले, JqIq 571 इंसाफ़ CT माटी के इस बेटे को, जीना सिखाया जाए, या फिर सुकून से इस धरती में सुलाया जाए! - ShareChat