ShareChat
click to see wallet page
search
#आज का इतिहास
आज का इतिहास - आजकाइतिह्वास वायसराय लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा पर रोक लगाई कोई समाज किसी ऐसी घटना की कल्पना कर सकता है , क्या जिसमें पति की मौत के बाद उसकी जीती जागती पत्नी को भी जलने के लिए मजबूर किया जाए और इसे प्रथा का नाम देकर ऐसी ही कुप्रथा थी, सही भी ठहराया जाए। सती प्रथा एक जिसमें पति की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को उसकी चिता में जीते जी झोंक दिया जाता था और भारत में व्याप्त इस कुप्रथा  को खत्म करने का श्रेय अंग्रेज वायसराय लॉर्ड विलियम बेंटिक को जाता है, जिन्होंने चार दिसंबर १८२१ को सती प्रथा पर रोक लगा दी। लॉर्ड बेंटिक भारतीय समाज से तमाम बुराइयां खत्म करने के हिमायती थे और उन्होंने नवजात कन्या वध की कुप्रथा का भी अंत किया था। १७१६  बाजीराव द्वितीय पेशवा  बनाए गए। १८६० - गोवा में मरगाव के निवासी अगस्टिनो लॉरेंसो ने पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ली। वह विदेशी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाले पहले भारतीय थे। १९५२ - इंग्लैंड में स्मॉग की घनी परत छाने के कारण हजारों लोगों की जान चली गई। आजकाइतिह्वास वायसराय लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा पर रोक लगाई कोई समाज किसी ऐसी घटना की कल्पना कर सकता है , क्या जिसमें पति की मौत के बाद उसकी जीती जागती पत्नी को भी जलने के लिए मजबूर किया जाए और इसे प्रथा का नाम देकर ऐसी ही कुप्रथा थी, सही भी ठहराया जाए। सती प्रथा एक जिसमें पति की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को उसकी चिता में जीते जी झोंक दिया जाता था और भारत में व्याप्त इस कुप्रथा  को खत्म करने का श्रेय अंग्रेज वायसराय लॉर्ड विलियम बेंटिक को जाता है, जिन्होंने चार दिसंबर १८२१ को सती प्रथा पर रोक लगा दी। लॉर्ड बेंटिक भारतीय समाज से तमाम बुराइयां खत्म करने के हिमायती थे और उन्होंने नवजात कन्या वध की कुप्रथा का भी अंत किया था। १७१६  बाजीराव द्वितीय पेशवा  बनाए गए। १८६० - गोवा में मरगाव के निवासी अगस्टिनो लॉरेंसो ने पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ली। वह विदेशी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाले पहले भारतीय थे। १९५२ - इंग्लैंड में स्मॉग की घनी परत छाने के कारण हजारों लोगों की जान चली गई। - ShareChat