#सतगुरुसंगत_छोड़कर_मोक्षनपावे
#godmorningsaturday
सद्गुरु ऐसा कीजिए, लोभ मोह भ्रम नाहिं। दरिया सो न्यारा रहे, दीसे दरिया माहिं ॥
कबीर साहेब जी कहते हैं कि सदगुरु ऐसा होना चाहिए, जिसके हृदय में लोभ न हो, मोह-माया से दूर हो तथा भ्रम-संदेह से मुक्त हो। ऐसा सद्गुरु इस संसार-रूपी सागर में दिखाई तो अवश्य पड़ता है, परंतु वह संसार की कुवासनाओं और महत्त्वाकांक्षाओं से अलग रहता है।


