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#सतगुरुसंगत_छोड़कर_मोक्षनपावे #godmorningsaturday सद्गुरु ऐसा कीजिए, लोभ मोह भ्रम नाहिं। दरिया सो न्यारा रहे, दीसे दरिया माहिं ॥ कबीर साहेब जी कहते हैं कि सदगुरु ऐसा होना चाहिए, जिसके हृदय में लोभ न हो, मोह-माया से दूर हो तथा भ्रम-संदेह से मुक्त हो। ऐसा सद्गुरु इस संसार-रूपी सागर में दिखाई तो अवश्य पड़ता है, परंतु वह संसार की कुवासनाओं और महत्त्वाकांक्षाओं से अलग रहता है।
सतगुरुसंगत_छोड़कर_मोक्षनपावे - कबीर साहेब जी कहते हैं कि सदगुरु ऐसा होना चाहिए, जिसके हृदय में लोभ न हो, मोहन्माया से दूर हो तथा भ्रम-संदेह से मुक्त हो। ऐसा सद्गुरु इस संसार रूपी सागर में दिखाई तो अवश्य पडता है, परंतु वह संसार की कुवासनाओं और महत्त्वाकांक्षाओं से अलग रहता है। న सद्गुरु ऐसा कीजिए, लोभ मोह भ्रम नाहिं। दरिया सो न्यारा रहे, दीसे दरिया माहिं ।l कबीर साहेब जी कहते हैं कि सदगुरु ऐसा होना चाहिए, जिसके हृदय में लोभ न हो, मोह-माया से दूर हो तथा भ्रम संदेह से मुक्त हो। ऐसा सद्गुरु इस संसार रूपी सागर में दिखाई तो अवश्य पड़़ता है॰ परंतु वह संसार की कुवासनाओं और महत्त्वाकांक्षाओं से अलग रहता है। कबीर साहेब जी कहते हैं कि सदगुरु ऐसा होना चाहिए, जिसके हृदय में लोभ न हो, मोहन्माया से दूर हो तथा भ्रम-संदेह से मुक्त हो। ऐसा सद्गुरु इस संसार रूपी सागर में दिखाई तो अवश्य पडता है, परंतु वह संसार की कुवासनाओं और महत्त्वाकांक्षाओं से अलग रहता है। న सद्गुरु ऐसा कीजिए, लोभ मोह भ्रम नाहिं। दरिया सो न्यारा रहे, दीसे दरिया माहिं ।l कबीर साहेब जी कहते हैं कि सदगुरु ऐसा होना चाहिए, जिसके हृदय में लोभ न हो, मोह-माया से दूर हो तथा भ्रम संदेह से मुक्त हो। ऐसा सद्गुरु इस संसार रूपी सागर में दिखाई तो अवश्य पड़़ता है॰ परंतु वह संसार की कुवासनाओं और महत्त्वाकांक्षाओं से अलग रहता है। - ShareChat