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उन लोगों ने जब मंदिर तोड़े तो ऐसा नहीं था कि पूरा नहीं तोड़ सकते थे उन्होंने जानबूझकर पूरा नहीं तोड़े कहीं जानबूझकर मूर्तियां खंडित की कहीं मूर्तियां भग्न किया लेकिन पूरी तरह से नष्ट नहीं किया। मंदिर के अवशेषों को ढका नहीं छुपाया नहीं भग्नावशेष पूरी तरह से तुम्हारे सामने रखा ताकि तुम और तुम्हारे आने वाली पीढ़ियां रोज़ देखकर अपमानित होती रहें और ग्लानि महसूस करते रहें खून के आसूं रोते रहो उनका खौफ और उनकी धाक तुम्हारे मन में याद ताजा रहें और हर रोज हर क्षण तुम्हारे आत्मसम्मान आत्मविश्वास आत्मबल आत्मबोध पर अप्रत्यक्ष चोट पहुंचती रहें। वो चाहते तो नन्दी को भग्न कर सकते थे उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया क्योंकि तुम याद रखो कि नंदीश्वर कहां हैं रोज तड़पो तरसो और दर्शन की अभिलाषा में घुट घुट कर मरो ऐसी मौत बहुत भयानक होती है क्योंकि इसमें व्यक्ति का स्वाभिमान आत्मसम्मान धर्म और राष्ट्र मरता है हर आक्रांता को ऐसी मौत देखने में आनन्द आता है। उन्होंने कभी सपने में भी सोचा नहीं था कि यही अधमरे आत्माभिमान शून्य लोग कभी एकजुट हो जाएंगे और अपनी विरासत वापस मांगेंगे उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि सामाजिक और मानसिक बौद्धिक सांस्कृतिक स्तर पर इतनी चोट के बाद भी हम संगठित हो जाएंगे। उन्होंने सोचा ही नहीं इन सोए मुरझाए लोगों को झकझोर कर जगाने के लिए मोदी आएगा । बहुत वर्षों तक अपमान झेलने के बाद कोई आया है जिसने स्वाभिमान जगाया जिसकी वजह से पथराई नन्दी की आंखों में उम्मीद की किरण जागी कोई आया जो राम को वापस लाया। उसे किसी कीमत पर मत खोना उसकी कमजोरी नहीं ताक़त बनकर अडिग खड़े रहना उसने वचन दिया है वो देश नहीं झुकने देगा और वो वचन का पक्का है। मोदी योगी को खो दिया तो तुम्हारा इंसाफ़ क़यामत के रोज़ होगा मोदी के साथ रहे तो संतों महंतों और ब्रम्हा विष्णु महेश के कृपापात्र रहोगे। आखिरी सांस तक मोदी योगी का साथ देना है। #आंखों देखी 😎
आंखों देखी 😎 - २५ निरवबर ৪০আবোহা २५ निरवबर ৪০আবোহা - ShareChat