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ब्रह्मचर्य — क्या यह केवल ब्रह्म-धर्म का व्रत है या ध्यान और आत्म-शक्ति की practical रणनीति? 🔥🧠 ब्रह्मचर्य का शाब्दिक अर्थ “ब्रह्म के अनुसार आचरण” है; यह इन्द्रियों के संयम, ध्यान की प्रवृत्ति और सांसारिक आसक्तियों से दूरी का मार्ग बताता है। ऐतिहासिक रूप से यह आश्रम-व्यवस्था का छात्र-चरण भी रहा (birth–25) जहाँ शिक्षा, गुरु-शिष्य परंपरा और नैतिक अनुशासन प्रमुख थे। पुराणों/महाकाव्यों में त्याग और प्रतिज्ञा के रूप में ब्रह्मचर्य का महत्व मिलता है (जैसे भीष्म की प्रतिज्ञा से जुड़ी कथाएँ)। स्वरूप में स्वामी विवेकानंद ने ब्रह्मचर्य को “veins में जलती आग” जैसा बताया — यानी संयम को सीधे मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ा जाना चाहिए। तर्क/साइंस की नजर से देखें तो संयम (self-control) ध्यान, लक्ष्य-निर्देशन और habit-formation के माध्यम से cognitive resources को पुनर्निर्देशित कर सकता है; पर आधुनिक शोध मिलेजुले परिणाम देता है — कुछ अध्ययनों ने यौन सक्रियता को वरिष्ठ पुरुषों में बेहतर cognition से जोड़ा है जबकि हालिया बड़े अध्ययनों ने sexlessness/sexlessness-समूहों से जुड़े अलग सामाजिक-मनोवैज्ञानिक पैटर्न दिखाए, इसलिए लाभ संदर्भ-निर्भर और individual-goal पर निर्भर है। अंतिम सोच: ब्रह्मचर्य को सिर्फ परंपरा न समझें—यह एक अभ्यास है जिसे आध्यात्मिक उद्देश्य, वैज्ञानिक समझ और व्यक्तिगत लक्ष्य के अनुसार परखा जाना चाहिए; आप क्या बदलते/देखते हैं, वही सच बताएगा। 🤔✨ #ब्रह्मचर्य #Brahmacharya #संयम #SelfControl #SwamiVivekananda 🙏🔥 {{295569720}} {{4296232291}} {{4531301345}} {{3925061778}} {{2805635957}} #ब्रह्मचर्य का #ब्रह्मचर्य की शक्ति ,,हिन्दू hindu power ⚔️⚔️🗡️ #ब्रह्मचर्य की शिक्षा #ब्रह्मचर्य जीवन #उत्तम ब्रह्मचर्य
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