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#Moral of the story #responsibility of a father 🙏 part - 5
Moral of the story - एक अजीब सी आवाज़़. तभी बाहर से आवाज़ आई- "भिक्षा दो, पुत्र. श्याम दौड़ता हुआ बाहर गया। वहाँ एक वृद्ध औरत थी - हाथ में झोला और एक पुरानी लाठी। বঙ্ক নীলী- "पुत्र, दो दिन से कुछ नहीं खाया... भोजन दे दो।" थोड़ा श्याम ने कहा - "घर में कच्ची चीज़ें हैं, पका भोजन नहीं। #34 भी भूखा हूँ और खाना बनाना नहीं आता। लिए 7 आप चाहें तो अंदर चलकर अपने बना सकती हैं।" वृद्धा मान गई। एक अजीब सी आवाज़़. तभी बाहर से आवाज़ आई- "भिक्षा दो, पुत्र. श्याम दौड़ता हुआ बाहर गया। वहाँ एक वृद्ध औरत थी - हाथ में झोला और एक पुरानी लाठी। বঙ্ক নীলী- "पुत्र, दो दिन से कुछ नहीं खाया... भोजन दे दो।" थोड़ा श्याम ने कहा - "घर में कच्ची चीज़ें हैं, पका भोजन नहीं। #34 भी भूखा हूँ और खाना बनाना नहीं आता। लिए 7 आप चाहें तो अंदर चलकर अपने बना सकती हैं।" वृद्धा मान गई। - ShareChat