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#दोहा
दोहा - 664 कहता कागद की लेखी मैं कहता आँरिवन की देरवी | मैं कहता सुरझावन 799 हारि , तू राखव्यौ उरझाई तुम कागज़ पर लिखी बात को सत्य कहते हो॰ लेकिन मैं आंखों देखा सच ही कहता और लिखता हूँ॰ मैं सरलता से हर बात को सुलझाना चाहता हूँ , लेकिन तुम उसे उलझा कर क्यों रख देते हो? जितने सरल बनोगे, उलझन से उतने ही दूर हो पाओगे. 664 कहता कागद की लेखी मैं कहता आँरिवन की देरवी | मैं कहता सुरझावन 799 हारि , तू राखव्यौ उरझाई तुम कागज़ पर लिखी बात को सत्य कहते हो॰ लेकिन मैं आंखों देखा सच ही कहता और लिखता हूँ॰ मैं सरलता से हर बात को सुलझाना चाहता हूँ , लेकिन तुम उसे उलझा कर क्यों रख देते हो? जितने सरल बनोगे, उलझन से उतने ही दूर हो पाओगे. - ShareChat