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#gulzar #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #दिल के अल्फाज़ #🖋शेरो-शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
gulzar - खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं हवा चले न चले दिन पलटते रहते है। ٦؟7 खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं हवा चले न चले दिन पलटते रहते है। ٦؟7 - ShareChat