क्या आप जानते हैं—नटराज का नृत्य ब्रह्मांड के सर्जनात्मक-विनाशात्मक चक्र का प्रतीक है और इसकी कला-वैज्ञानिक व्याख्या सदियों से चर्चा का विषय रही है। शैव परंपरा सदियों पुरानी आत्म-अन्वेषण, योग और भक्ति की एक व्यापक परंपरा है जिसमें वेदिक-पुराणिक भक्ति से लेकर तांत्रिक/गूढ़ अद्वैत पथ और नाथ, पाशुपत जैसे उप-सम्प्रदायों तक विविधताएँ पाई जाती हैं; इसका ऐतिहासिक प्रसार भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक हुआ। कश्मीर शैववाद और नाथ परंपरा ने गहन ध्यान-दर्शन विकसित किए और अभिनवगुप्त जैसे सिद्धान्तकारों ने इन्हें दार्शनिक रूप दिया। तर्क/साइंस के नजरिए से देखा जाए तो शैव ध्यान और योग के अभ्यास (विशेषकर नॉन-डुअल पद्धतियाँ) मनोवैज्ञानिक और तंत्रिका-विज्ञान के ध्यान-अध्ययनों में देखे जाने वाले आत्म-स्वरूप और ध्यानस्थिरता के प्रभावों से मेल खाते हैं — यह एक वैज्ञानिक अनुमान/विश्लेषण है जो परंपरा के अभ्यास और आधुनिक शोध को जोड़कर समझता है। समकालीन चर्चा में कुछ प्रथाएँ, जैसे माहवारी के आधार पर मंदिर-प्रवेश पर रोक, सामाजिक-वैज्ञानिक और मानवाधिकार के दृष्टिकोण से अनुचित और भेदभावपूर्ण मानी जानी चाहिए; इन्हें चुनौती देना जरूरी है। हैरानी की बात: नटराज की प्रतीकात्मकता सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि कला-इतिहास और ऊर्जा/प्राकृतिक चक्रों के रूपकों के तौर पर भी आँकी जाती है, इसलिए इसकी पहुँच लोक-संस्कृति से वैश्विक कला-मंच तक दिखती है। "शिव भीतर की शून्यता में जागता प्रकाश है" — एक छोटा सा उद्धरण जो इस परंपरा की आत्म-अनुभूति को पकडता है। 🕉️🙏 #शैवपरंपरा #Shiva 🔱 #नटराज #कश्मीर_शैववाद #योग
@परंपरा @Arvendra Kushwaha @आपली परंपरा @नाथ वारकरी परंपरा @Sam Khan #शैव परंपरा #बम - बम भोले #--- #viral #नटराज पेंसिल प्राइवेट लिमिटेड जॉब रिक्वायरमेंट कंपनी #


