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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #गुलज़ार साहब की शायरी #गुलज़ार साहब📝 #गुलज़ार साहब 📝
✍मेरे पसंदीदा लेखक - चिट्ठी ही आईना संदेसा आया न हर आहट पे आने का अंदेसा आया किवड़िया हिला दे रे कोई मूठी झूठी 'J 0 Gvo) | गुलजार साहब (पलॅकों की छांव में चिट्ठी ही आईना संदेसा आया न हर आहट पे आने का अंदेसा आया किवड़िया हिला दे रे कोई मूठी झूठी 'J 0 Gvo) | गुलजार साहब (पलॅकों की छांव में - ShareChat