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dailyramvichar - वचन धर्म होते हैं, पिता और गुरु के उनका पालन करना ही पुत्र का परम कर्तब्य है। जो धर्म के मार्ग पर चलता है, उसका कोई भी अनिष्ट नहीं कर सकता | सत्य, शील ओर करुणा 5 यही मनुष्य का सबसे बड़ा 8 81 को जो मनुष्य ढूसरों सुख ढ़ेकर स्वयं भी रहता है, वहीं सुखी धर्म सच्चा धर्मत्मा है। धर्म वही है जो सव प्राणियों के कल्याण के लिए 77/ Gulaghclnn07 1{ 27 40GU81 25 वचन धर्म होते हैं, पिता और गुरु के उनका पालन करना ही पुत्र का परम कर्तब्य है। जो धर्म के मार्ग पर चलता है, उसका कोई भी अनिष्ट नहीं कर सकता | सत्य, शील ओर करुणा 5 यही मनुष्य का सबसे बड़ा 8 81 को जो मनुष्य ढूसरों सुख ढ़ेकर स्वयं भी रहता है, वहीं सुखी धर्म सच्चा धर्मत्मा है। धर्म वही है जो सव प्राणियों के कल्याण के लिए 77/ Gulaghclnn07 1{ 27 40GU81 25 - ShareChat