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#मेरी हृदय मेरी माँ #आध्यात्मिक दृष्टिकोण #आध्यात्मिक रचना
मेरी हृदय मेरी माँ - किसी की बातों में दोष निकालन बहुत आसान है पर गुण देखना आसान नहीं जब तक मनुष्य मे अपनी दशा का चित्रण करने की क्षमता स्थापित न हो सोच हृदय को कपाता है किन्तु कोई निरादर न कर दे ऐसा सोच भयभीत करता है! किसी की बातों में दोष निकालन बहुत आसान है पर गुण देखना आसान नहीं जब तक मनुष्य मे अपनी दशा का चित्रण करने की क्षमता स्थापित न हो सोच हृदय को कपाता है किन्तु कोई निरादर न कर दे ऐसा सोच भयभीत करता है! - ShareChat