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#क #कहता है रजनीश
क - रिमझिम, बरसात से कभी मिलती है, खुशी कभी इसके ही कहर से जीवन अस्तनव्यस्त। जो कभी खुशियां अपार दे जाता है, तो कभी जीवन को कर देता है त्रस्त।। > की तलाश में अजीब विडंबना है हम खुशी अपने आप को ही गर्त में डुबोते जा रहे हैं। विकास के नाम पर विनाश के बीज बोकर मन में खुश होकर विनाश करीब जा रहे हैं।। आज हम बदलते मौसम से परेशान हें उसके कहर के हम स्वयं जिम्मेदार हैं। अधिक वृक्ष लगाओ, का नारा लगाते हैं वृक्ष लगाने की बजाय काट रहे है।। हमीं रिमझिम, बरसात से कभी मिलती है, खुशी कभी इसके ही कहर से जीवन अस्तनव्यस्त। जो कभी खुशियां अपार दे जाता है, तो कभी जीवन को कर देता है त्रस्त।। > की तलाश में अजीब विडंबना है हम खुशी अपने आप को ही गर्त में डुबोते जा रहे हैं। विकास के नाम पर विनाश के बीज बोकर मन में खुश होकर विनाश करीब जा रहे हैं।। आज हम बदलते मौसम से परेशान हें उसके कहर के हम स्वयं जिम्मेदार हैं। अधिक वृक्ष लगाओ, का नारा लगाते हैं वृक्ष लगाने की बजाय काट रहे है।। हमीं - ShareChat