जब हम किसी ऐसे इंसान से उम्मीद बाँध लेते हैं जो हमें समझने की क्षमता या इच्छा ही नहीं रखता, तो हम अपने दुख को बढ़ाते हैं। यह ऐसा है जैसे किसी बंद दरवाज़े को बार-बार खटखटाना, जबकि दूसरी तरफ कोई खोलने वाला ही न हो। बेहतर यही है कि उस दरवाज़े से हट जाएँ और उस रास्ते की ओर चलें जहाँ लोग हमारी भावनाओं की कद्र करते हों।
"जो तुम्हें न समझे, उसे तुम भी भूल जाओ।।" क्योंकि जीवन किसी को मनाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को जीने और समझने वालों के संग मुस्कुराने के लिए है।
जय श्री कृष्णा :- 🙏💖🌈💫🌟🕉️✨
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