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#kavita
kavita - टूटता तारा जब भी गगन से गुजरता है, किसी दिल की ख्वाहिश चुपके से संवरता है, सपसा को पकड़ लो उउ रोशनी की दोर में टूटता तारा जब भी गगन से गुजरता है, किसी दिल की ख्वाहिश चुपके से संवरता है, सपसा को पकड़ लो उउ रोशनी की दोर में - ShareChat