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#@khari khari by shikha #khari khari baate #घोर कलयुग
@khari khari by shikha - जब भी पति और ससुराल धोखा खाकर, अत्याचार सहकर पति को समर्पित पत्नी जब भी ईश्वर को बुलाती है रोते हुए, उनसे न्याय मांगती है.. लिए उस पीड़ित पत्नी की पुकार हर दोषी के सर्वनाश जरूर लाती है, हर आंसू , हर प्रार्थना , हर बार गिड़गिड़ा कर पति से प्रार्थना करना कि जिंदगी खराब ना करे, विवाह का को चुने या बाहर रानो को... मज़ाक ना बनाए या पत्नी पति की बेवफाई, ससुराल पक्ष के ताने और बदतमीजी.. पत्नी की तड़पती आत्मा जब ईश्वर को पुकारती है उसी दिन से ईश्वर की लाठी तैयार होने लगती है हर दुष्ट के लिए जो एक बेकसूर लड़की की जिंदगी बरबाद करते है ಗ' की तरह उसे नोचकर.. बचती तो वो राने और उनका खानदान भी नहीं हाय से बेकसूर   लड़की की जिंदगी बरबाद करवा के चिप्स जो किसी के पति पर लटककर हनीमून जाती है எகி खाकर उस और उस पत्नी के आंसुओं पर हंसती है.... ईश्वर सबकुछ देखते है, कई बार तो पूरी दुनिया सब कुछ देखती है कि बंद जगह कितना वीभत्स और गंदा रूप है रानो परिणाम जरूर मिलता है हर कार्य का, ईश्वर की लाठी का नाटक करने , विक्टिम कार्ड खेलने का समय नहीं देती , जब पड़ती है तब मनुष्य को ईश्वर से माफी मांगने का समय भी नहीं मिलता, नर्क की यात्रा होती है, घोर नर्क की.... जब भी पति और ससुराल धोखा खाकर, अत्याचार सहकर पति को समर्पित पत्नी जब भी ईश्वर को बुलाती है रोते हुए, उनसे न्याय मांगती है.. लिए उस पीड़ित पत्नी की पुकार हर दोषी के सर्वनाश जरूर लाती है, हर आंसू , हर प्रार्थना , हर बार गिड़गिड़ा कर पति से प्रार्थना करना कि जिंदगी खराब ना करे, विवाह का को चुने या बाहर रानो को... मज़ाक ना बनाए या पत्नी पति की बेवफाई, ससुराल पक्ष के ताने और बदतमीजी.. पत्नी की तड़पती आत्मा जब ईश्वर को पुकारती है उसी दिन से ईश्वर की लाठी तैयार होने लगती है हर दुष्ट के लिए जो एक बेकसूर लड़की की जिंदगी बरबाद करते है ಗ' की तरह उसे नोचकर.. बचती तो वो राने और उनका खानदान भी नहीं हाय से बेकसूर   लड़की की जिंदगी बरबाद करवा के चिप्स जो किसी के पति पर लटककर हनीमून जाती है எகி खाकर उस और उस पत्नी के आंसुओं पर हंसती है.... ईश्वर सबकुछ देखते है, कई बार तो पूरी दुनिया सब कुछ देखती है कि बंद जगह कितना वीभत्स और गंदा रूप है रानो परिणाम जरूर मिलता है हर कार्य का, ईश्वर की लाठी का नाटक करने , विक्टिम कार्ड खेलने का समय नहीं देती , जब पड़ती है तब मनुष्य को ईश्वर से माफी मांगने का समय भी नहीं मिलता, नर्क की यात्रा होती है, घोर नर्क की.... - ShareChat