आख़िर क्यों देश के असली लौहपुरुष सरदार पटेल को पहचानने में 41 साल लग गए? सोचिए — जवाहरलाल नेहरू का निधन 1964 में हुआ और उन्हें भारत रत्न मिला 1955 में। इंदिरा गांधी का निधन 1984 में हुआ, भारत रत्न मिला 1971 में। राजीव गांधी का निधन 1991 में हुआ और उसी साल भारत रत्न भी दे दिया गया। मगर सरदार पटेल — जिन्होंने 562 रियासतों को जोड़कर एक भारत बनाया, जिनकी दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय ने इस देश को एकता दी — उनका निधन 1950 में हुआ, और भारत रत्न मिला 1991 में! यानी चार दशक बाद, तब जब नेहरू परिवार की बारी पूरी हो चुकी थी।
क्या यही है “कांग्रेस संस्कृति”? जहाँ परिवार पहले, राष्ट्र निर्माता बाद में! इतिहास गवाह है — जिसने देश जोड़ा, उसे भुलाया गया, और जिन्होंने देश को बाँटा, उन्हें ताज पहनाया गया। यही थी असली राजनीति, जो आज भी सवाल बनकर खड़ी है #✊राष्ट्रीय एकता दिवस 🤝 #📢31 अक्टूबर के अपडेट 📰 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🎞️आज के वायरल अपडेट्स #👍 मोदी फैन क्लब


