क्षमावाणी पर्व, जिसे क्षमावाणी, क्षमावानी या क्षमा पर्व भी कहा जाता है, जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण वार्षिक उत्सव है। यह पर्व आत्म-शुद्धि, क्षमा और अहिंसा के सिद्धांतों को मजबूत करता है।
कब मनाया जाता है: यह पर्व दिगंबर जैन समुदाय के दस लक्षण महापर्व (पर्युषण पर्व) के अंतिम दिन मनाया जाता है, जिसे 'उत्तम क्षमा' के नाम से भी जाना जाता है। 2025 में, क्षमावाणी पर्व सोमवार, 8 सितंबर को मनाया जाएगा।
महत्व: क्षमावाणी पर्व का मुख्य उद्देश्य सभी जीवित प्राणियों से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगना और उन्हें क्षमा करना है। यह दिन "उत्तम क्षमा" के भाव के साथ समाप्त होता है, जिसका अर्थ है "मेरे सभी बुरे कर्म क्षय हों तथा मैं सभी से क्षमायाचना करता हूँ।" यह आध्यात्मिक शुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त करने का एक अनूठा अवसर है।
जैन धर्म में, क्षमा को आत्मा का गुण माना जाता है, जिसमें करुणा और परस्पर मैत्रीभाव का संदेश निहित है। यह पर्व मन की मलिनता को दूर कर सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देता है। इस दिन सभी प्राणी एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं और क्षमा करते हैं, जिससे मन में कटुता समाप्त होकर निर्मलता आती है।
यह पर्व किसी विशेष घटना या महापुरुष से नहीं जुड़ा है, बल्कि यह सार्वभौमिक और शाश्वत है, जो सभी मनुष्यों के लिए प्रासंगिक है। यह आत्म-शुद्धि का एक महान पर्व है, और इसका महत्व सभी धर्मों में किसी न किसी रूप में स्वीकार किया गया है। #क्षमावाणी पर्व #🗞breaking news🗞 #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #aaj ki taaja khabar


