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#गुलजार शायरी #गुलजार साहेब
गुलजार शायरी - हवार्ओं की तरह करीब सै गुजर जाते है, कुछरिश्ते सिर्फ तऱ्हाईरमे ही मुर्कुराते है हवार्ओं की तरह करीब सै गुजर जाते है, कुछरिश्ते सिर्फ तऱ्हाईरमे ही मुर्कुराते है - ShareChat