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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - यहाँ गरीब को मरने की इसलिए भी॰ जल्दी है ग़ालिब कहीं जिन्दंगी की कशमकश में कफ़न महँगा नाहो जाए। यहाँ गरीब को मरने की इसलिए भी॰ जल्दी है ग़ालिब कहीं जिन्दंगी की कशमकश में कफ़न महँगा नाहो जाए। - ShareChat