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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #🖊 एक रचना रोज़ ✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - कुछ जख्मों की कोई उम्र नहीं होती, ताउम्र साथ चलते हैं जिस्म के ख़ाक होने d5.! = कुछ जख्मों की कोई उम्र नहीं होती, ताउम्र साथ चलते हैं जिस्म के ख़ाक होने d5.! = - ShareChat