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सुगति यानी सौभाग्य और दुर्गति यानी दुर्भाग्य, हमारे पहले किए गए कर्मों के कारण ही प्राप्त होते हैं। जैसे वर्षा के समय मेहनत करके धान बोया जाए तो हेमंत के समय में अन्न का भंडारण किया जा सकता है, लेकिन आलस्य करके काम न कर सोते रहने से भंडार खाली रहता है। मनुष्य एक क्षण भी बिना काम किए नहीं रह सकता। यदि कोई आवश्यकता से अधिक आराम करता है, तो यह काम न करना नहीं, बल्कि गलत काम करना है। इससे दुर्गति यानी दुर्भाग्य आता है। इसलिए सुकर्म करके सुगति यानी सौभाग्य प्राप्त करने के मार्ग पर चलना आवश्यक है। कर्मैव कारणं चात्र सुगतिं दुर्गतिं प्रति । कर्मैव प्राक्तनमपि क्षणं किं कोऽस्ति चाक्रियः ॥ #परमपिता परमात्मा शिव बाबा लव यू #🎶शिव भजन🔱
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