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#गुलजार साहेब
गुलजार साहेब - Guzat कुछ यूं॰भी है দিনহন নী इंसान की बारिश खत्म हाे जाये बोझ लगती है तो छतरी Guzat कुछ यूं॰भी है দিনহন নী इंसान की बारिश खत्म हाे जाये बोझ लगती है तो छतरी - ShareChat