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बिहार के मोतिहारी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को हिला दिया है।
अरेराज थाना क्षेत्र के वार्ड 10 निवासी रंजीत कुमार की पत्नी गुंजा जुलाई महीने में अचानक लापता हो गई। गुंजा के मायके वालों ने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि रंजीत, उसकी माँ और पिता ने दहेज के लिए गुंजा की हत्या कर दी और उसका शव जला दिया। यह मामला हरसिद्धि क्षेत्र में दर्ज कराया गया।
पुलिस ने श्मशान घाटों से लेकर मुजफ्फरपुर तक हर उस जगह तलाश की जहाँ जली हुई लाश का कोई निशान मिल सकता था, लेकिन कुछ नहीं मिला। कोई शव नहीं, कोई ठोस सबूत नहीं। फिर भी आरोप इतना बड़ा था कि रंजीत को जेल भेज दिया गया और वह पिछले पांच महीनों से जेल में बंद है।
गाँव में चर्चा फैल चुकी थी कि गुंजा की हत्या कर दी गई है और सबूत मिटा दिए गए हैं। मामला लगभग खत्म माना जा चुका था। लेकिन अरेराज थाना अध्यक्ष प्रत्याशा कुमारी और अपर थाना अध्यक्ष रमेन्द्र कुमार की टीम ने जांच रोकने के बजाय और गहराई से काम किया।
फोन लोकेशन, बैंक ट्रेल और डिजिटल रिकॉर्ड ने एक अलग ही दिशा दिखानी शुरू की। सबूत कह रहे थे कि गुंजा ना मरी है और ना कहीं गायब हुई है, बल्कि किसी दूर शहर में जिंदा है।
आखिरकार पुलिस ने गुंजा को दिल्ली-नोएडा इलाके से पकड़ लिया। वह वहां अपने पुराने आशिक के साथ रह रही थी। आशिक जो उसके मायके वाले गांव का पड़ोसी बताया जाता है।
अब पुलिस यह जांच कर रही है कि गुंजा ने खुद को ‘मरी हुई’ क्यों दिखाया, कैसे उसके परिवार ने पति को फँसाया और पांच महीनों तक सभी को कैसे गुमराह किया गया।
मोतिहारी में सिर्फ एक ही बात चर्चा में है-
पति जेल में था, और पत्नी दिल्ली में अपने आशिक के साथ ऐश कर रही थी।
आप बताइए, इस मामले में सबसे बड़ा दोष किसका है?


