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##श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि - Hatd Im चित्राणि दार्ठियः कुतपस्तिलाः | ভাচিব   (লঙকীকা कतप   (िनकी লঙকা] आठवा  तिस-सेतोन तपा चोदीका दान 5ad) T दानं कथासंकीर्तनादिकम ।। ५२ 3mcl irraid' गारकालमे    फना  शरा कोथोउख्वगमन त्पर।  पविप्न माने गपे 6l५२ ऐ रनेन्द। नरकतकि तिप उतानतापन = पे तीन आार्त चमित  काप मागगमन ओर T न्यमेतनन সাম্পেন I1 43 नद्म भोजन फेवलोको भौ॰हन तोनोफा पितरस्तथा नप। मातामहा  n7 1 Biar +66044/ ते पुंसा सर्व श्राद्धं प्रकुर्वताम् । ५४  74! ஈ ர fr वर्तमान में f मातामर तया कटम्यीजन - मभी सन्तपर गते योगापारशच चन्दमाः Idururl ` সাHা ধনষদা ` সা 147 M. fmk नयौगम्तु तर्मासूपाल शस्यते I१ ५५  रमतपे गरम पोगिसनको মাHাা শাবা  सत जी महाराज रामपाल নিস্রক কনো সশি ববস ৫1৬4 /ঢ বেন | বতিপাপাযা பர विपाणा  चत्पुग्तः स्थितः | ஈ எபர் ஈப ஈ5 ஈரி 17்7  के सभी शिष्य योगी हैं तारयति यजमान  तथा  नप।। ५६  पनमानफे सरित ठन सनका उखार कादेता ४।५६।  परौचिष्गपणण 7437 7~1.773117;` 140 अनुकूल भक्ति जा शास्त्र साधना करते हैं। विष्णु पुराण के तीसरे श्री संत रामपाल जी के सानिध्य में अंश के अध्याय १५ ংলাক महीने में भंडारे होते 55 - 56 हर 2 3 पर लिखा है कि श्राद्ध के भोज हैं जहाँ सभी योगिजन भंडारा में यदि एक योगी यानि खाते हैं जो व्यक्ति उस भंडारे में शास्त्रोक्त साधक को भोजन दान करता है उससे उनके सभी करवाया जाए तो वह योगी पितरों का उद्धार हा जाता है। श्राद्ध भोज में आए हजार अतः श्राद्ध करने की शास्त्र ब्राह्मणों तथा यजमान के पूरे अनुकूल विधि जानने के लिए परिवार सहित तथा सर्व पितरों देखिए का उद्धार कर देता है। Sant Rampal Ji Maharaj YouTubel V<. Channel JITIIT: Aaa 07ಗ(( SPIRITUAL LEADER X @SAINTRAMPALJIM  SANT RAMPAL JI SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAI Hatd Im चित्राणि दार्ठियः कुतपस्तिलाः | ভাচিব   (লঙকীকা कतप   (िनकी লঙকা] आठवा  तिस-सेतोन तपा चोदीका दान 5ad) T दानं कथासंकीर्तनादिकम ।। ५२ 3mcl irraid' गारकालमे    फना  शरा कोथोउख्वगमन त्पर।  पविप्न माने गपे 6l५२ ऐ रनेन्द। नरकतकि तिप उतानतापन = पे तीन आार्त चमित  काप मागगमन ओर T न्यमेतनन সাম্পেন I1 43 नद्म भोजन फेवलोको भौ॰हन तोनोफा पितरस्तथा नप। मातामहा  n7 1 Biar +66044/ ते पुंसा सर्व श्राद्धं प्रकुर्वताम् । ५४  74! ஈ ர fr वर्तमान में f मातामर तया कटम्यीजन - मभी सन्तपर गते योगापारशच चन्दमाः Idururl ` সাHা ধনষদা ` সা 147 M. fmk नयौगम्तु तर्मासूपाल शस्यते I१ ५५  रमतपे गरम पोगिसनको মাHাা শাবা  सत जी महाराज रामपाल নিস্রক কনো সশি ববস ৫1৬4 /ঢ বেন | বতিপাপাযা பர विपाणा  चत्पुग्तः स्थितः | ஈ எபர் ஈப ஈ5 ஈரி 17்7  के सभी शिष्य योगी हैं तारयति यजमान  तथा  नप।। ५६  पनमानफे सरित ठन सनका उखार कादेता ४।५६।  परौचिष्गपणण 7437 7~1.773117;` 140 अनुकूल भक्ति जा शास्त्र साधना करते हैं। विष्णु पुराण के तीसरे श्री संत रामपाल जी के सानिध्य में अंश के अध्याय १५ ংলাক महीने में भंडारे होते 55 - 56 हर 2 3 पर लिखा है कि श्राद्ध के भोज हैं जहाँ सभी योगिजन भंडारा में यदि एक योगी यानि खाते हैं जो व्यक्ति उस भंडारे में शास्त्रोक्त साधक को भोजन दान करता है उससे उनके सभी करवाया जाए तो वह योगी पितरों का उद्धार हा जाता है। श्राद्ध भोज में आए हजार अतः श्राद्ध करने की शास्त्र ब्राह्मणों तथा यजमान के पूरे अनुकूल विधि जानने के लिए परिवार सहित तथा सर्व पितरों देखिए का उद्धार कर देता है। Sant Rampal Ji Maharaj YouTubel V<. Channel JITIIT: Aaa 07ಗ(( SPIRITUAL LEADER X @SAINTRAMPALJIM  SANT RAMPAL JI SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAI - ShareChat