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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - वो रह गए इतराते अपनी चालाकियों पे वो समझ ही नहीं पाए की वो क्या गवा 48 8...!! वो रह गए इतराते अपनी चालाकियों पे वो समझ ही नहीं पाए की वो क्या गवा 48 8...!! - ShareChat