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#मानव कर्म #आपण आपल्या कर्म आणि कर्तव्यामध्ये.., प्रामाणिक रहा.. #कर्म #कर्म आणी धर्म #कर्म ही धर्म
मानव कर्म - कर्म कैसे बिगड़ते हैं. से वस्त्र मांगकर पहनने से। दूसरों अपने नाखू़न चबाने से। 2 दक्षिण दिशा में मुंह करके भोजन करने से। Shiv hi satya hai मंगल और शनिवार के दिन बाल कटवाने से। भोजन की नींदा करने और कमियां निकालने से। 5 Shiv hi satva hai थाली में ही हाथ धोने से। दक्षिण दिशा में पैर करके सोने से। बाल कटवाने के बाद स्नान नहीं करने से। Shiv hi satya hai किए चंदन का तिलक लगाने से। बिना स्नान १० रात में वस्त्र धोकर बाहर के लिए डालने से। सूखने ~ कर्म कैसे बिगड़ते हैं. से वस्त्र मांगकर पहनने से। दूसरों अपने नाखू़न चबाने से। 2 दक्षिण दिशा में मुंह करके भोजन करने से। Shiv hi satya hai मंगल और शनिवार के दिन बाल कटवाने से। भोजन की नींदा करने और कमियां निकालने से। 5 Shiv hi satva hai थाली में ही हाथ धोने से। दक्षिण दिशा में पैर करके सोने से। बाल कटवाने के बाद स्नान नहीं करने से। Shiv hi satya hai किए चंदन का तिलक लगाने से। बिना स्नान १० रात में वस्त्र धोकर बाहर के लिए डालने से। सूखने ~ - ShareChat