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#Gulzaar ki shayari
Gulzaar ki shayari - जिन्दगी की दोड में तजुर्बा कच्चा ही रह गया, हम सीख नपाये फरेब और दिल बच्चा ही रह गया बचपन में जहां चाहा हॅस लेते थे , जहां चाहा रो लेते थे, मुस्कान को तमीज़ चाहिए परअव और आसुओ को तन्हाई  हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में॰  मुस्कुराने की वजह दुंढते हैं, লী जिंदगी तुम हमें दुंढो , हम तुम्हे ढुंढते है॰ जिन्दगी की दोड में तजुर्बा कच्चा ही रह गया, हम सीख नपाये फरेब और दिल बच्चा ही रह गया बचपन में जहां चाहा हॅस लेते थे , जहां चाहा रो लेते थे, मुस्कान को तमीज़ चाहिए परअव और आसुओ को तन्हाई  हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में॰  मुस्कुराने की वजह दुंढते हैं, লী जिंदगी तुम हमें दुंढो , हम तुम्हे ढुंढते है॰ - ShareChat