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अपनी कहानियों में पहाड़ी क्षेत्रों में फैली ग़रीबी, कठिन जीवन संघर्ष, प्रतिरोध, औद्योगिक मजदूरों के हालात तथा जाति और धर्म की रूढ़िगत समस्याओं को उठाने वाले शेखर जोशी हिन्दी के अन्यतम कहानीकार हैं। ‘कोशी का घटवार’ और ‘बदबू’ जैसी उनकी कहानियाँ पाठकों को बेहद प्रभावित करती हैं। वे वर्ष 1955 से 1986 तक एक सैनिक औद्योगिक प्रतिष्ठान में कार्यरत रहे, किन्तु उन्होंने साहित्य-सृजन के लिए यह नौकरी छोड़ दी। उन्हें लेखन के लिए 'महावीरप्रसाद द्विवेदी पुरस्कार' तथा 'साहित्य भूषण' सम्मान और 'पहल सम्मान' से सम्मानित किया गया। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें नमन! #shekharjoshi #🙏जय माता दी📿 #🙏नवरात्रि Status🙏 #✈Last travel memories😎 #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #🎶हैप्पी रोमांटिक स्टेटस
🙏जय माता दी📿 - ShareChat
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