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#sahmat ho naa #Aap log sahmat hai
sahmat ho naa - प्रेम को केवल वही रश्ते परिभाषित कर सकते है जो मिलने से लेकर निभाने तक उसे परखते नहीं बल्कि समझते है। प्रेम को केवल वही रश्ते परिभाषित कर सकते है जो मिलने से लेकर निभाने तक उसे परखते नहीं बल्कि समझते है। - ShareChat