ShareChat
click to see wallet page
search
#मेरी हृदय मेरी माँ #आध्यात्मिक दृष्टिकोण #आध्यात्मिक रचना
मेरी हृदय मेरी माँ - यदि जीवन के इस कठोर महासागर को जितना है तो संघर्ष करो क्योंकि बैठ जाना सिर्फ रुकना नहीं, ल बल्कि भीतर से हार मान लेना है क्योंकि जो मनुष्य गिरकर भी उठने का साहस नहीं खोता, उसी के सामने किस्मत एक दिन नतमस्तक होती है। यदि जीवन के इस कठोर महासागर को जितना है तो संघर्ष करो क्योंकि बैठ जाना सिर्फ रुकना नहीं, ल बल्कि भीतर से हार मान लेना है क्योंकि जो मनुष्य गिरकर भी उठने का साहस नहीं खोता, उसी के सामने किस्मत एक दिन नतमस्तक होती है। - ShareChat