ShareChat
click to see wallet page
search
#प्रेम
प्रेम - प्रेम जब हृदय से उपज होता है तो वह सरल नहीं रहता बाकी उसमें अपनी चाह भी होती है के विरह की पीड़ा भी। और दूसरे यही द्वंद्व अपना प्रेम और दूसरों की व्याकुलता है मन में एक ज़िद एक दुराग्रह-सा बना देता है जो प्रेम को और भी गहरा और कष्टकारी बना देता है। प्रेम जब हृदय से उपज होता है तो वह सरल नहीं रहता बाकी उसमें अपनी चाह भी होती है के विरह की पीड़ा भी। और दूसरे यही द्वंद्व अपना प्रेम और दूसरों की व्याकुलता है मन में एक ज़िद एक दुराग्रह-सा बना देता है जो प्रेम को और भी गहरा और कष्टकारी बना देता है। - ShareChat