जय सीता राम 🙏🌺 — ये सिर्फ नारा नहीं, भाषाई-ऐतिहासिक रूप से "जय/जया" (सफलता/विजय) + "सिया-राम" का संयोग है जो ग्रामीण अभिवादन से लेकर भक्ति-संगीत और बड़ी सार्वजनिक सभाओं तक पहुंचा; विकिपीडिया बताता है कि यह Ramanandi साधुओं के आम स्वागत शब्दों में रहा है और Ram Mandir भूमि पूजन में भी प्रमुख रूप से उपयोग हुआ। दर्शनात्मक और सामाजिक विश्लेषण से देखा जाए तो यह वाक्यांश समूह-गठन और सहानुभूति का संकेत देता है (यानी सोशल कॉहेशन का कार्य) पर वैज्ञानिक तौर पर जब किसी धार्मिक अभिवादन को राजनीति या हिंसा के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है तो वह उसके मूल भाव—सहनशील भक्ति—को विकृत करता है; ऐसे उपयोगों को मैं गलत मानता/मानती हूँ और समाज में शांति व सम्मान को प्राथमिकता देनी चाहिए। एक रोचक तथ्य — कई पारंपरिक भजनों और रामायण-उपस्थापनों में "सिया-राम" का उच्चारण पुरुषों और महिलाओं दोनों में समान श्रद्धा दर्शाता है, जो इस वाक्यांश की अनलक्षित लैंगिक समतामूलक प्रकृति को दर्शाता है; इसे अपनाते हुए हम भक्ति में समावेशन और तर्क-संगत सोच दोनों साथ रख सकते हैं। ✨🕉️🔥 #JaiSitaRam #SiyaRam #SitaRama #RamBhakti #DharmAndReason 🙏🌿
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