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#यथार्थ_गीता_ज्ञान पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे। फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं हैं। Sant Rampal Ji Maharaj
यथार्थ_गीता_ज्ञान - গনযচিনী২ ಭalನtla श्रीमद्भागवद गीता अध्याय ११ श्लोक ४७ में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि 'हे अजुर्न यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।' Ra उपरोक्त विवरण से एक तथ्य यह हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल (श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेतवत् प्रवेश करके अपना विराट रूप काल) ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है। ನ್ಲ   संत रामपाल जी महाराज जी से Ll নিঃথুল্ক निःशुल्क नामदीक्षा व ` पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +917496801825 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI SUPREMEGOD ORG @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ গনযচিনী২ ಭalನtla श्रीमद्भागवद गीता अध्याय ११ श्लोक ४७ में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि 'हे अजुर्न यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।' Ra उपरोक्त विवरण से एक तथ्य यह हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल (श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेतवत् प्रवेश करके अपना विराट रूप काल) ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है। ನ್ಲ   संत रामपाल जी महाराज जी से Ll নিঃথুল্ক निःशुल्क नामदीक्षा व ` पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +917496801825 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI SUPREMEGOD ORG @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat