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#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - 84. I ಫ || "अश्रुओं से जो है लबालब, पर न छलके वो बांध हूं मैं। हृदय मचलते प्रबल स्वरों का, दबा हुआ जो वो नांद 8 #1 योगी' कठिन है डगर मगर ये, बढे जा रहे हैं पग निरंतर। अंधेरी रातों में भी निकल के, जो जगमगाए वो चांद हूं मैं।।" तिवारी "योगी" रघुवीर ogi Your uotein 84. I ಫ || "अश्रुओं से जो है लबालब, पर न छलके वो बांध हूं मैं। हृदय मचलते प्रबल स्वरों का, दबा हुआ जो वो नांद 8 #1 योगी' कठिन है डगर मगर ये, बढे जा रहे हैं पग निरंतर। अंधेरी रातों में भी निकल के, जो जगमगाए वो चांद हूं मैं।।" तिवारी "योगी" रघुवीर ogi Your uotein - ShareChat