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Rashtrageet "vande matram" ke 150 th anniversary ke avsar par pm modi ke speech ki kuch khas baate #rashtrageet
rashtrageet - प्रधानमंत्री ने कहा- ख्वीद्रनाथ टैगोर ने एक बार मोदी ने कहा- वंदे मातरम् एक शब्द, एक मंत्र, एक कहा था कि बकिमचंद्र का ' आनंदमठ ' सिर्फ एक इतिहास में है। चंदे ப एक सकल्प मातरम् हमें  नर्ही हे। यह स्वतंत्र भारत का एक सपना उपन्यास जाता है।ये हमारे भविष्य को नया हौसला देता  है। बकिम बाबू के लिखे हर शब्द का गहरा मतलब कि ऐसा कोई संकल्प नहीं जिसकी सिद्धी न हो के दोर में हुई थी, है। इस गीत की रचना गुलामी  सके, ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जो हम भारतवासी पा लेकिन यह सिर्फ उसी समय तक सीमित नहीं हे। वंदे मातरम् हर प्रासंगिक है। युग में सकें। कहा- जब १८७५ में बकिम चंद्र ने PM बंगदर्शन में चंदे मातरम प्रकाशित किया, तो कुछ লীণী ন মীঘা ক্ি 46  एक गीत है। हालांकि सिर्फ धीरे ्धीरे, चंदे मातरमू भारत स्वतंत्रता संग्राम क ला्खों लोगों की आवाज बना। एक ऐसी आवाज जिसने हर भारतीय की भावनाओं की प्रतिथ्वनि किया। मोदी ने कहा- आज जब हम अपने राष्ट्रीय गीत पूरे होने का जश्न मना रहे हैं यह क १५० साल  श्रद्धांजलि है।  देश के महान नायकों के प्रति हमार उन लार्खों शहीर्दों को नमन हे, जिन्होने फांसी चढ़ते ढुए बंदे मातरम् का नारा लगाया, जिन्होंने बंदे मातरम् जपते ढुए को्ड़ों की मार झेली।  प्रधानमंत्री ने कहा- ख्वीद्रनाथ टैगोर ने एक बार मोदी ने कहा- वंदे मातरम् एक शब्द, एक मंत्र, एक कहा था कि बकिमचंद्र का ' आनंदमठ ' सिर्फ एक इतिहास में है। चंदे ப एक सकल्प मातरम् हमें  नर्ही हे। यह स्वतंत्र भारत का एक सपना उपन्यास जाता है।ये हमारे भविष्य को नया हौसला देता  है। बकिम बाबू के लिखे हर शब्द का गहरा मतलब कि ऐसा कोई संकल्प नहीं जिसकी सिद्धी न हो के दोर में हुई थी, है। इस गीत की रचना गुलामी  सके, ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जो हम भारतवासी पा लेकिन यह सिर्फ उसी समय तक सीमित नहीं हे। वंदे मातरम् हर प्रासंगिक है। युग में सकें। कहा- जब १८७५ में बकिम चंद्र ने PM बंगदर्शन में चंदे मातरम प्रकाशित किया, तो कुछ লীণী ন মীঘা ক্ি 46  एक गीत है। हालांकि सिर्फ धीरे ्धीरे, चंदे मातरमू भारत स्वतंत्रता संग्राम क ला्खों लोगों की आवाज बना। एक ऐसी आवाज जिसने हर भारतीय की भावनाओं की प्रतिथ्वनि किया। मोदी ने कहा- आज जब हम अपने राष्ट्रीय गीत पूरे होने का जश्न मना रहे हैं यह क १५० साल  श्रद्धांजलि है।  देश के महान नायकों के प्रति हमार उन लार्खों शहीर्दों को नमन हे, जिन्होने फांसी चढ़ते ढुए बंदे मातरम् का नारा लगाया, जिन्होंने बंदे मातरम् जपते ढुए को्ड़ों की मार झेली। - ShareChat