फ़र्क़ साफ़ है भाई… बिल्कुल साफ़।
1990 का अयोध्या। मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। कारसेवकों पर गोलियाँ चलाने का हुक्म दिया गया। सैकड़ों नौजवान, जिनके हाथ में सिर्फ़ रामनाम की माला थी, उन्हें कारसेवा के नाम पर गोली मार दी गई। लाशें सरयू में बहाई गईं। तब मुलायम को मीडिया ने “मौलाना मुलायम” का खिताब दिया था। और राम मंदिर का सपना वहीं रुक गया… 30 साल के लिए।
2024 का अयोध्या। बीजेपी की सरकार। वही जगह जहाँ कभी ख़ून बहरा था, आज वहाँ भव्य राम मंदिर खड़ा है। 500 साल का इंतज़ार ख़त्म हुआ। 22 जनवरी 2024 को रामलला अपने घर में विराजमान हुए। दुनिया ने देखा – जिस मंदिर के लिए लोग मर गए थे, वो अब बन गया। बिना एक भी गोली चले। बिना एक भी सिर फूटे। क़ानून के रास्ते, संविधान के रास्ते।
एक तरफ़ था तुष्टिकरण का दौर – जहाँ रामभक्तों पर गोलियाँ चलती थीं, और मंदिर बनाने की बात करने वालों को जेल भेजा जाता था।
दूसरी तरफ़ है संकल्प का दौर – जहाँ राम मंदिर नहीं सिर्फ़ बना, बल्कि पूरी दुनिया ने उसकी भव्यता को सलाम किया।
फ़र्क़ साफ़ है ना?
एक तरफ़ थी वो सरकार – जो राम के नाम पर गोली चलवाती थी।
दूसरी तरफ़ है वो सरकार – जो राम के नाम पर मंदिर बनवाती है।
बस यही फ़र्क़ है… और यही फ़र्क़ 2029 में भी दिखेगा।
जय श्री राम। 🙏🏹 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🛕मंदिर दर्शन🙏 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🛕राम मंदिर के शिखर पर लहराया धर्म ध्वज 🚩


