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#Gulzaar ki shayari
Gulzaar ki shayari - मेरी फितरत में नहीं था तमाशा करना, बहुत कुछ जानते थे तब भी खामोश रहे हम। -गुलज़ार मेरी फितरत में नहीं था तमाशा करना, बहुत कुछ जानते थे तब भी खामोश रहे हम। -गुलज़ार - ShareChat