भगवान विश्वकर्मा: सृष्टि के दिव्य वास्तुकार
भगवान विश्वकर्मा को हिन्दू धर्म में सृजन और निर्माण का देवता माना जाता है। वेदों और पुराणों में उन्हें देवताओं का वास्तुकार, शिल्पकार और प्रथम इंजीनियर के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने ही स्वर्ग लोक, सोने की लंका, द्वारका नगरी और हस्तिनापुर जैसे भव्य नगरों का निर्माण किया था।
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?
भगवान विश्वकर्मा को अक्सर ब्रह्मा जी का पुत्र कहा जाता है, हालांकि कुछ ग्रंथों में उन्हें अंगिरस ऋषि और वास्तु का पुत्र भी बताया गया है।
उन्हें यंत्रों का अधिष्ठाता और मानव समाज को सुख-सुविधाएँ प्रदान करने वाले अनेक भौतिक साधनों का निर्माता माना जाता है।
उन्होंने वैमानिक विद्या, यंत्र निर्माण विद्या आदि का भी उपदेश दिया, जिससे मानव जाति ने भौतिक उन्नति प्राप्त की।
विश्वकर्मा जयंती
विश्वकर्मा जयंती, जिसे विश्वकर्मा पूजा के नाम से भी जाना जाता है, भगवान विश्वकर्मा के अवतरण का पर्व है। यह हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है, जब सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। 2025 में, विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।
महत्व और पूजन विधि
यह पर्व विशेष रूप से कारीगरों, शिल्पकारों, इंजीनियरों, आर्किटेक्टों और विभिन्न निर्माण से जुड़े व्यवसायों से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन, वे अपने कार्यस्थलों, औजारों, मशीनों और उपकरणों की पूजा करते हैं, ताकि उनके काम में समृद्धि, सफलता और सुचारू संचालन बना रहे।
विश्वकर्मा पूजा के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर अपने कार्यस्थलों को साफ करते हैं, सजाते हैं और फिर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर के साथ अपने औजारों और मशीनों की पूजा करते हैं। इस दिन इन औजारों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह दिन कर्मयोग के आदर्श को दर्शाता है, जहाँ कार्य के प्रति निष्ठा और समर्पण का महत्व है।
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