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गुलजार शायरी - बिछड़ते वक़्त मेरे सारे ऐब गिनाये उसने सोचता हूँ जब मिला था तब कौन सा हुनर था मुझमें | @shubnu creation # गुलज़ार बिछड़ते वक़्त मेरे सारे ऐब गिनाये उसने सोचता हूँ जब मिला था तब कौन सा हुनर था मुझमें | @shubnu creation # गुलज़ार - ShareChat