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#🙏गुरु महिमा😇 “गरीब, सेवक हो कर उतरे, इस पृथ्वी के माहि। जीव उधारन जगतगुरु, बार-बार बलि जांही।।🙏🙏
🙏गुरु महिमा😇 - "कबीर वाणीं? Cம` कबीर, समुंदर की मसि करूँ सात लेखनि करूँ बनराय। धरती सब कागद करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय।। भावार्थः कबीर साहेब जी कहते हैं कि यदि मैं सातों समुद्रों के जल की स्याही बना लूँ तथा समस्त वॅन समूहों की लेखनी कर लूँ, तथा सारी पृथ्वी को कागज़ कर लूँ॰ भी गुरु के गुण को लिखा नहीं जा নন सकत। क्योंकि गुरु अनंत गुणों से युक्त है।  "कबीर वाणीं? Cம` कबीर, समुंदर की मसि करूँ सात लेखनि करूँ बनराय। धरती सब कागद करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय।। भावार्थः कबीर साहेब जी कहते हैं कि यदि मैं सातों समुद्रों के जल की स्याही बना लूँ तथा समस्त वॅन समूहों की लेखनी कर लूँ, तथा सारी पृथ्वी को कागज़ कर लूँ॰ भी गुरु के गुण को लिखा नहीं जा নন सकत। क्योंकि गुरु अनंत गुणों से युक्त है। - ShareChat