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#" रूबरू करवाता हूं आपको कुछ मेरी कलम से, कुछ मेरे हुनर से " #💞Heart touching शायरी✍️ #🥰 इमोशनल पल
" रूबरू करवाता हूं आपको कुछ मेरी कलम से, कुछ मेरे हुनर से " - बाबा जन्म न दियो इस संसार में, खिलने से पहले तोड़ी गई हूं। मेरे नन्हें पाँव ज़मी पे पडे़ नही, ने सही खिलौने पकड़े नही।  हार्थों आंखों में प्यार झलकता रहा, గొ मेरे मासूम चेहरे को चूमे सभी।  मेरे ज़िश्म से खेल गया दरिंदा कोई बाबा ज़िश्म में रूह तड़पता रहा,वो मज़े लेकर लूटता रहा।  रही ढूंढती  मां की ममता भरी आंचल मां के आंचल में छिपने को तड़पती रही।  अंगड़ाई , मां की ममता जब जब लेगी पास न पाकर मां बिलख बिलखकर बहुत रोएगी।  मुझे माफ़ करना, अब बेटी को दुनियां में न लाना,  নানা कोई बेटी को,बाबा मेरी बात को याद रखना। यूं न रोँदेगा  छलक ही गए मेरे आंखों से आंसू॰ जब सुना ये दर्दनाक मंज़र।  जन्म न दियो इस संसार में, बाबी खिलने से पहले ही तोडी गई हूं। डा.इक़बाल रौशन बाबा जन्म न दियो इस संसार में, खिलने से पहले तोड़ी गई हूं। मेरे नन्हें पाँव ज़मी पे पडे़ नही, ने सही खिलौने पकड़े नही।  हार्थों आंखों में प्यार झलकता रहा, గొ मेरे मासूम चेहरे को चूमे सभी।  मेरे ज़िश्म से खेल गया दरिंदा कोई बाबा ज़िश्म में रूह तड़पता रहा,वो मज़े लेकर लूटता रहा।  रही ढूंढती  मां की ममता भरी आंचल मां के आंचल में छिपने को तड़पती रही।  अंगड़ाई , मां की ममता जब जब लेगी पास न पाकर मां बिलख बिलखकर बहुत रोएगी।  मुझे माफ़ करना, अब बेटी को दुनियां में न लाना,  নানা कोई बेटी को,बाबा मेरी बात को याद रखना। यूं न रोँदेगा  छलक ही गए मेरे आंखों से आंसू॰ जब सुना ये दर्दनाक मंज़र।  जन्म न दियो इस संसार में, बाबी खिलने से पहले ही तोडी गई हूं। डा.इक़बाल रौशन - ShareChat