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Devuthni ekadashi ka mahatva #devuthni ikadasi #muhurat
devuthni ikadasi - यानी कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें हे। ज्योतिषी नवंबर को देवउठनी एकादशी  ओज आज इस दिन को अबूझ मुहूर्त मानते हैं॰ इसलिए ये सीजन  दिन देव जगाने की परंपरा है। यानी पिछले चार महीने विवाह मुहूर्त होता है। देवउठनी एकादशी पर  विष्णु  chl 46el से योग निद्रा में सोए भगवान को शंख बजाकर बिना मुहूर्त देखे भी शादी कर सकते हैं। #FT पुराणों  जगाया जाता है। दिनभर महापूजा चलती है और हे कि इस दिन নিনাচ বুলমী और भगवान शालग्राम का आरती होती है। शाम को शालग्राम रूप में भगवान हुआ था।ये ही वजह है कि इस दिन से शादियों का  और तुलसी  में लक्ष्मी जी का [ా विवाह চীনা रूप भी शुरू हो जाता है।  सीजन है। घर और मंदिरों को सजाकर दीपक जलाए जाते महीने योगनिद्रा  विष्णु  माना जाता है भगवान हैं। तुलसी शालग्राम  चार विवाह नहीं करवा सकते तो सिर्फ में रहते है और इसी दिन जागते हैं, इसलिए इसे देव  इनकी पूजा भी कर सकते हैं। प्रबोधिनी एकादशी कहते हें। गृह प्रवेश और बाकी मांगलिक काम भी इसी दिन से शुरू होते हैं।  इस साल नवंबर में १४ और दिसंबर में 3 मुहूर्त २ नवंबर से शादियां शुरू होंगी और सीजन का आखिरी मुहूर्त 6 दिसंबर रहेगा। शुक्र ग्रह अस्त होने के कारण * नर्हीं होंगे। आमतौर पर १५ दिसंबर में ज्यादा মুচুন : दिसंबर तक तो शादियों के मुहूर्त रहते ही हें। इसके  बाद हे। जिसमें शादियां नर्हीं होती।  धनुर्मास शुरू जाता यानी कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें हे। ज्योतिषी नवंबर को देवउठनी एकादशी  ओज आज इस दिन को अबूझ मुहूर्त मानते हैं॰ इसलिए ये सीजन  दिन देव जगाने की परंपरा है। यानी पिछले चार महीने विवाह मुहूर्त होता है। देवउठनी एकादशी पर  विष्णु  chl 46el से योग निद्रा में सोए भगवान को शंख बजाकर बिना मुहूर्त देखे भी शादी कर सकते हैं। #FT पुराणों  जगाया जाता है। दिनभर महापूजा चलती है और हे कि इस दिन নিনাচ বুলমী और भगवान शालग्राम का आरती होती है। शाम को शालग्राम रूप में भगवान हुआ था।ये ही वजह है कि इस दिन से शादियों का  और तुलसी  में लक्ष्मी जी का [ా विवाह চীনা रूप भी शुरू हो जाता है।  सीजन है। घर और मंदिरों को सजाकर दीपक जलाए जाते महीने योगनिद्रा  विष्णु  माना जाता है भगवान हैं। तुलसी शालग्राम  चार विवाह नहीं करवा सकते तो सिर्फ में रहते है और इसी दिन जागते हैं, इसलिए इसे देव  इनकी पूजा भी कर सकते हैं। प्रबोधिनी एकादशी कहते हें। गृह प्रवेश और बाकी मांगलिक काम भी इसी दिन से शुरू होते हैं।  इस साल नवंबर में १४ और दिसंबर में 3 मुहूर्त २ नवंबर से शादियां शुरू होंगी और सीजन का आखिरी मुहूर्त 6 दिसंबर रहेगा। शुक्र ग्रह अस्त होने के कारण * नर्हीं होंगे। आमतौर पर १५ दिसंबर में ज्यादा মুচুন : दिसंबर तक तो शादियों के मुहूर्त रहते ही हें। इसके  बाद हे। जिसमें शादियां नर्हीं होती।  धनुर्मास शुरू जाता - ShareChat