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#आचार्य प्रशांत - Aacharya Prashant #♦️💯🙏 आचार्य प्रशांत 🙏💯♦️
आचार्य प्रशांत - Aacharya Prashant - 'भूत पिसाच निकट नहिं आवै' का वास्तविक अर्थक्या है ? आचार्य प्रशांत हनुमान चालीसा की शुरुआत ही, "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर" से होती है। पहला ही शब्द ' ज्ञान है। जब ज्ञान रहता है, तो ये भूतःप्रेत आदि व्यर्थताएँ दिमाग़ में आती ही नहीं | भूत पिशाच आदि का कोई अस्तित्व नहीं होता, लेकिन जिसका अंधविश्वास है कि भूत प्रेत तो होते ही हैं उसको संतों ने कहा कि हनुमान जी का जाप करोगे तो निकट नहीं आएँगे | हनुमान, श्रीराम तक भूतःप्रेत पहुँचने का साधन हैं | एक बार श्रीराम के निकट आ जाओगे, तो अंधविश्वास से ही मुक्त ` हो जाओगे| নেয 'भूत पिसाच निकट नहिं आवै' का वास्तविक अर्थक्या है ? आचार्य प्रशांत हनुमान चालीसा की शुरुआत ही, "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर" से होती है। पहला ही शब्द ' ज्ञान है। जब ज्ञान रहता है, तो ये भूतःप्रेत आदि व्यर्थताएँ दिमाग़ में आती ही नहीं | भूत पिशाच आदि का कोई अस्तित्व नहीं होता, लेकिन जिसका अंधविश्वास है कि भूत प्रेत तो होते ही हैं उसको संतों ने कहा कि हनुमान जी का जाप करोगे तो निकट नहीं आएँगे | हनुमान, श्रीराम तक भूतःप्रेत पहुँचने का साधन हैं | एक बार श्रीराम के निकट आ जाओगे, तो अंधविश्वास से ही मुक्त ` हो जाओगे| নেয - ShareChat