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#कलमाएकबीर कबीर-माँस अहारी मानई, प्रत्यक्ष राक्षस जानि। ताकी संगति मति करै, होइ भक्ति में हानि।।1।। कबीर-माँस खांय ते ढेड़ सब, मद पीवैं सो नीच। कुलकी दुरमति पर हरै, राम कहै सो ऊंच।।2।। कबीर-माँस भखै औ मद पिये, धन वेश्या सों खाय। जुआ खेलि चोरी करै, अंत समूला जाय।।5।। कबीर-माँस माँस सब एक है, मुरगी हिरनी गाय। आँखि देखि नर खात है, ते नर नरकहिं जाय।।6।। कबीर-यह कूकर को भक्ष है, मनुष देह क्यों खाय। मुखमें आमिख मेलि के, नरक परंगे जाय।।7।। कबीर-पापी पूजा बैठि कै, भखै माँस मद दोइ। तिनकी दीक्षा मुक्ति नहीं, कोटि नरक फल होइ।।10।।
कलमाएकबीर - कुरान शरीफ में मांस खाने का संकेत अल्लाह का नहीं है वास्तव में हजरत मुहम्मद जी को एक जिब्राईल नामक फरिश्ते ने गला घोंट घोंट कर जबरदस्ती डरा धमका कर कुरान शरीफ का ज्ञान लिखवाया था , अपने ही बनाये जीवों को मार कर खाने का आदेश कभी अल्लाह का नहीं हो सकता | प्रमाण = पुस्तक जीवनी हजरत मुहम्मद , सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम॰ पृष्ठ ३०७-३1५ ) अधिक जानकारी मालूमात ) लिये  के लिए पढ़ें पाक पुस्तक निःशुल्क पुस्नक  नदी मुसलमान HF पूरा नाम पता भेजे  'मुसलमान नहीं समझे ज्ञान क़ुरआन " 999 2509 502 ज्ञान करआन Al Kabir Islamic Al Kabir Islamic Al Kabir Islamic' Al_Kabir_Islamic कुरान शरीफ में मांस खाने का संकेत अल्लाह का नहीं है वास्तव में हजरत मुहम्मद जी को एक जिब्राईल नामक फरिश्ते ने गला घोंट घोंट कर जबरदस्ती डरा धमका कर कुरान शरीफ का ज्ञान लिखवाया था , अपने ही बनाये जीवों को मार कर खाने का आदेश कभी अल्लाह का नहीं हो सकता | प्रमाण = पुस्तक जीवनी हजरत मुहम्मद , सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम॰ पृष्ठ ३०७-३1५ ) अधिक जानकारी मालूमात ) लिये  के लिए पढ़ें पाक पुस्तक निःशुल्क पुस्नक  नदी मुसलमान HF पूरा नाम पता भेजे  'मुसलमान नहीं समझे ज्ञान क़ुरआन " 999 2509 502 ज्ञान करआन Al Kabir Islamic Al Kabir Islamic Al Kabir Islamic' Al_Kabir_Islamic - ShareChat