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Rashtrageet vande matram ke 150 th years hue purn #rashtrageet
rashtrageet - चदुे मातरमू दैनिमभास्कर की रचना  इस साल वंदे मातरम ನೌ೯' ক 150 মাল गए हैं। इस गीत को बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय  ने रचा  था। रवींद्रनाथ टैगोर ने इस गीत की धुन बनाई। पहली बार १८९६ में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में यह गीत गाया गया था। १४ अगस्त १९४७ की रात्रि में संविधान सभा की बैठक का प्रारंभ वंदे मातरम' के साथ  पहली हुआ था। आज पढ़िए आजादी का सशक्त  नारा बने इस गीत का मूल रूप ओर इसका " हिन्दी भावार्थ मूल गीत भावा अनुवाद वन्दे मातरम् योगी और दार्शनिक श्रीअरविंद सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् घोष ने इस गीत का यह शस्यश्यामलां मातरम्। সাবানুনান মত ক জদ স কিয়া वन्दे मातरम्।  I- पुलकितयामिनीम  शुभ्रज्योत्स्ना  हे मां! तेरी धरती जल से भरपूर है, फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम् -फूल से लदी हुई है, मलय  सुहासिँनीं सुमधुर भाषिणीम्, প- পবল কী ঠsী মুযথ মী হীনল  सुखदां वरदां मातरम्। ৮, ঔনী স লচলচানী কমল ম वन्दे मातरम्। आच्छादित है। तेरी रातें चांदनी से मूल गीत आगे इस तरह है  पुलकित हो उठती हैं और नहाकर सप्तकोटि कण्ठ कलकल निनाद कराले पत्तों सेसजे কুলী বর  खिले वृक्ष द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले।  रहते हें। तू मुस्कान बिखेरने वाली  अबला केनो मां तुमि एतो बले मधुर वाणी बोलने वाली, सुख देने बहुबल धारिणीं , नमामि तारिणीं वाली है। तेरे करोड़ों पुत्रों के गले रिपुदलवारिणीं मातरम्। में गूंजती  से उठी आवाज गगन तन्दे मातरम्। है और करोडों भुजाओं में तलवारें  तुमि विद्या, तुमि धर्म, तुमि हृदि, तुमि मर्म।  ओर अस्त्र शस्त्र चमकते हें। कौन त्वॅम् हि प्राणाः शरीरे , बाहुते तुमि मा शक्ति, কিনু निर्बल है, मां? ಹFrl ೯ तुमि मा भक्ति, तोमारै प्रतिमा गड़ि గైడ तू अपार शक्ति है, संकट से पार मन्दिरे मन्दिरे मातरम्। वन्दे मातरम्।  लगाने वाली हे और शत्रुओं  क नाश करने वाली है। तू ही ज्ञान है, त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी  कॅमलदलविहारिणी।  धर्म है, हृदय में हे और तू ही जीवन  कमला है। तू प्राण है, वाणी विद्यादायिनी भुजाओं  কা মা नमामि त्वाम, नमामि कमलाम की शक्ति हे ओर हृदय की भक्ति সমলাম গনুলাম, সুসলা মুক্চলা है। हम तुझे ही पूजते हैं, हे मां! तू मातरम। ही दसों अस्त्रनशस्त्र धारण करने वन्दे मातरम्।  বালী সাঁ ব্রুয ট, কমল ক সামন श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम पर विराजमान मां लक्ष्मी है। तू मां  धरणीं भरणीं मातरम्। सरस्वती है, हे निर्मल मां! में तुझे वन्दे मातरम्।  ೯ प्रणाम करता चदुे मातरमू दैनिमभास्कर की रचना  इस साल वंदे मातरम ನೌ೯' ক 150 মাল गए हैं। इस गीत को बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय  ने रचा  था। रवींद्रनाथ टैगोर ने इस गीत की धुन बनाई। पहली बार १८९६ में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में यह गीत गाया गया था। १४ अगस्त १९४७ की रात्रि में संविधान सभा की बैठक का प्रारंभ वंदे मातरम' के साथ  पहली हुआ था। आज पढ़िए आजादी का सशक्त  नारा बने इस गीत का मूल रूप ओर इसका " हिन्दी भावार्थ मूल गीत भावा अनुवाद वन्दे मातरम् योगी और दार्शनिक श्रीअरविंद सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् घोष ने इस गीत का यह शस्यश्यामलां मातरम्। সাবানুনান মত ক জদ স কিয়া वन्दे मातरम्।  I- पुलकितयामिनीम  शुभ्रज्योत्स्ना  हे मां! तेरी धरती जल से भरपूर है, फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम् -फूल से लदी हुई है, मलय  सुहासिँनीं सुमधुर भाषिणीम्, প- পবল কী ঠsী মুযথ মী হীনল  सुखदां वरदां मातरम्। ৮, ঔনী স লচলচানী কমল ম वन्दे मातरम्। आच्छादित है। तेरी रातें चांदनी से मूल गीत आगे इस तरह है  पुलकित हो उठती हैं और नहाकर सप्तकोटि कण्ठ कलकल निनाद कराले पत्तों सेसजे কুলী বর  खिले वृक्ष द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले।  रहते हें। तू मुस्कान बिखेरने वाली  अबला केनो मां तुमि एतो बले मधुर वाणी बोलने वाली, सुख देने बहुबल धारिणीं , नमामि तारिणीं वाली है। तेरे करोड़ों पुत्रों के गले रिपुदलवारिणीं मातरम्। में गूंजती  से उठी आवाज गगन तन्दे मातरम्। है और करोडों भुजाओं में तलवारें  तुमि विद्या, तुमि धर्म, तुमि हृदि, तुमि मर्म।  ओर अस्त्र शस्त्र चमकते हें। कौन त्वॅम् हि प्राणाः शरीरे , बाहुते तुमि मा शक्ति, কিনু निर्बल है, मां? ಹFrl ೯ तुमि मा भक्ति, तोमारै प्रतिमा गड़ि గైడ तू अपार शक्ति है, संकट से पार मन्दिरे मन्दिरे मातरम्। वन्दे मातरम्।  लगाने वाली हे और शत्रुओं  क नाश करने वाली है। तू ही ज्ञान है, त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी  कॅमलदलविहारिणी।  धर्म है, हृदय में हे और तू ही जीवन  कमला है। तू प्राण है, वाणी विद्यादायिनी भुजाओं  কা মা नमामि त्वाम, नमामि कमलाम की शक्ति हे ओर हृदय की भक्ति সমলাম গনুলাম, সুসলা মুক্চলা है। हम तुझे ही पूजते हैं, हे मां! तू मातरम। ही दसों अस्त्रनशस्त्र धारण करने वन्दे मातरम्।  বালী সাঁ ব্রুয ট, কমল ক সামন श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम पर विराजमान मां लक्ष्मी है। तू मां  धरणीं भरणीं मातरम्। सरस्वती है, हे निर्मल मां! में तुझे वन्दे मातरम्।  ೯ प्रणाम करता - ShareChat