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"उत्तम ब्रह्मचर्य" का अर्थ है ब्रह्मचर्य का सर्वोच्च रूप, जिसे जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण गुण माना जाता है। यह केवल शारीरिक संयम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से पूर्ण शुद्धता को दर्शाता है। यहां "उत्तम ब्रह्मचर्य" के कुछ मुख्य पहलू दिए गए हैं: आत्मा में लीन होना: "ब्रह्म" का अर्थ आत्मा है, और "चर्या" का अर्थ है उसमें रमन करना या लीन होना। इस प्रकार, उत्तम ब्रह्मचर्य का अर्थ है अपनी चेतना को आत्मा के केंद्र में रखना, न कि इंद्रिय सुखों में। पूर्ण इंद्रिय नियंत्रण: यह सभी इंद्रियों, विशेष रूप से यौन इच्छाओं पर पूर्ण नियंत्रण का अभ्यास है। इसमें न केवल शारीरिक क्रियाओं से बचना, बल्कि कामुक विचारों और इच्छाओं को भी जीतना शामिल है। मानसिक और भावनात्मक पवित्रता: उत्तम ब्रह्मचर्य में विचारों, भावनाओं और बोलचाल में पवित्रता बनाए रखना शामिल है। इसका अर्थ है किसी भी प्रकार के द्वेष, ईर्ष्या या अशुद्ध विचारों से दूर रहना। सभी के प्रति सम्मान: जैन परंपरा में, उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए, महिलाओं को माता, बहन या पुत्री के समान देखने का दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जाती है। यह कामुकता से परे जाकर सार्वभौमिक प्रेम और सम्मान को बढ़ावा देता है। आंतरिक शक्ति का संचय: ब्रह्मचर्य को ऊर्जा के संरक्षण और उन्नयन का माध्यम माना जाता है। जब व्यक्ति अपनी ऊर्जा को इंद्रिय सुखों में व्यर्थ नहीं करता, तो वह ऊर्जा आंतरिक शक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक विकास में परिवर्तित होती है। आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग: इसे आत्म-नियंत्रण और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाने वाला मार्ग माना जाता है। यह भोग की दुनिया से ऊपर उठकर योग की ऊंचाइयों तक ले जाता है। संक्षेप में, उत्तम ब्रह्मचर्य केवल यौन संयम नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण जीवन में आत्म-अनुशासन, पवित्रता और आध्यात्मिक चेतना का उच्चतम स्तर है। #उत्तम ब्रह्मचर्य #🗞️6 सितंबर के अपडेट 🔴 #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #aaj ki taaja khabar #🗞breaking news🗞
उत्तम ब्रह्मचर्य - उत्तम ब्रह्मचर्य उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन करने से व्यक्ति को ब्रह्मांड संबंधी ज्ञान और आंतरिक शक्ति की प्राप्ति होती है। इस दिन लोग स्वयं में सद्भाव और सद्गुणों को विकसित करने का संकल्प लेते हैं। I Ilulll (I(ulllF" उत्तम ब्रह्मचर्य उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन करने से व्यक्ति को ब्रह्मांड संबंधी ज्ञान और आंतरिक शक्ति की प्राप्ति होती है। इस दिन लोग स्वयं में सद्भाव और सद्गुणों को विकसित करने का संकल्प लेते हैं। I Ilulll (I(ulllF" - ShareChat