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#கவிதை #கவிதை #கவிதை
கவிதை - प्रीत की वही पुरानी रीत बन जाती जीवन का गीत आँखों में बन कर ख्वाब सुहाने मन को तुम लेती हो जीत Yogesh kumur ~ धोखे से भी धोखा नहीं दिया है हमने , इस तरह से बनाकर भेजा है हमें रब ने ! अब तक बहुत हल्के में लिया है सब ने., लेकिन अब मुक्त कर दिया है हमें भी हमारे सब्र ने ! नंदिनी 0)4)0)6)4)7)0!) प्रीत की वही पुरानी रीत बन जाती जीवन का गीत आँखों में बन कर ख्वाब सुहाने मन को तुम लेती हो जीत Yogesh kumur ~ धोखे से भी धोखा नहीं दिया है हमने , इस तरह से बनाकर भेजा है हमें रब ने ! अब तक बहुत हल्के में लिया है सब ने., लेकिन अब मुक्त कर दिया है हमें भी हमारे सब्र ने ! नंदिनी 0)4)0)6)4)7)0!) - ShareChat